शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2008

साई इतना दिजिये जामे कुटुम समाय ……………

"साई इतना दिजिये जामे कुटुम समाय ……………" इस भारतीय भावना मै जंग लग गया है। बात गुज़रे दिनो कि हो गई है, अब परिस्थिति इसके विपरीत है। वर्तमान की भावना 'स्व' मे इस कदर घिर चुकी है, जिसने पुरानी परम्परओ को तार तार कर दिया है। आज स्थिति इतनी भयावह है जहा अपने ही घर मे दुश्मनों जैसा व्यवहार सहना पड रहा है।आज़ादी के लिये प्राण न्योछाबर करने वाले नेताओ ने कभी न सोचा होगा कि स्वतंत्र भारत के लोग भी परतंत्र मानसिकता के शिकार हो जायेंगे।
जनता का जनता के लिये जनता द्वारा चलाया गया शासन कहे जाने वाले लोकतंत्र मे भी जनता नेताओं के हाथ कि कठपुतली बन जायेंगे। अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिये राजनेता देश को जाति भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांट रहे है। इससे उनके हित का तो पोषण होता है। मगर दुख की बात है कि आम जनता भी चंद असामाजिक प्रवृत्ति वाले नेताओं कि बात मे आकर स्वविवेक खो रहे है । क्षेत्रवाद कर नेता अपनी राजनीति की रोटी सेक रहे है। उनकी एक ही नीति होती ह "फूट डालो और शासन करो" पर क्या भारत की करोड़ों की आबादी इतनी असहाय हो चुकी है जो इन्हे अपनी मनमानी करने दे? विश्व का सबसे बडा लिखित संविधान क्या हमारे लिये एक मोटी किताब भर बनकर रह गया है? भारत के नागरिकों को भारत की नागरिकता प्राप्त होती है। न कि किसी प्रांत विशेष की । भारत मे कही भी स्वतंत्रता पूर्वक रहना हमारा मौलिक अधिकार है। इस तरह की अलगाववादी नीति सिवाय अशांति के और कुछ नही दे सकती है। घर की माली हालत को सुधारने के लिये इसके सदस्यों को ही घर से बाहर निकाल देना राज ठाकरे जैसे तानाशाहों की नीति हो सकती है, जिससे किसी का भला होने वाला नही है।
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिये जरूरी है कि हम सब अपने अधिकारों को समझे और एक सच्चे लोकतंत्र का निर्वहन करें। गुन्डागर्दी करने वाले नेताओं के बहकावे मे आकर अपना विकास अबरूधः नही होने दें। भारत जहां सभी जाति , धर्म और वर्ग के लोग एक साथ मिलकर रह्ते है। जिस संस्कृति का डंका विश्व भर मे बजता है आइये इसे फिर से पल्लवित करें और गुनगुनायें ……………साई इतना दिजिये जामे कुटुम समाय , मै भी भुखा न रहूँ साधु ना भूखा जाय।

11 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

bahut barhia... aap isi tarah samaj ko... apna aainaa dikhaate rahiye...dhanyawad

regards
Hitendra Gupta

Udan Tashtari ने कहा…

उत्तम विचार-सत्य वचन, साधु साधु.

-हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है. निरंतर लेखन के लिये शुभकामनायें.

अनुनाद सिंह ने कहा…

बहुत सही विचारा है आपने। भारत की एकता को तोड़ना अत्यन्त निन्दनीय है और अक्षम्य अपराध है।

आपका हिन्दी चिट्ठाकारिता में स्वागत है। ऐसे ही मियमित लिखते रहें।

mamta ने कहा…

ब्लॉगिंग की दुनिया मे आपका स्वागत है।
अच्छा लेख।

अजय कुमार झा ने कहा…

julie jee,
shubh sneh. blogjagat mein aapkaa swaagat hai. apne bilkul sahee kahaa hai. aaj hum jis yug mein pahunch gaye hain wahan bhaavnaaon, jazbaaton , rishtey, sab kuchh bemaani ho chale hain. aage bhee likhatee rahein

ghughutibasuti ने कहा…

आपका स्वागत है । अपने विचार हम सबसे साँझे करते रहिये ।
घुघूती बासूती

राज भाटिय़ा ने कहा…

काश की ऎसे विचार सभी भारत के नागरिक हे हो,आप से बहुत प्रभावित हुये .

डॉ.ब्रजेश शर्मा ने कहा…

aapke blog ko dekh padh kar achcha laga.
likhti rahiyega.

ajayekal ने कहा…

Good thought well expressed.
Ajay Singh"Ekal"
ajayekal.blogspot.com

अनाम ने कहा…

Bahut acha kiha hai Apne Thanks for shearing this info

अनाम ने कहा…

vichaar bahut achchaa hai